टीम इंडिया ने चेन्नई में खेले गए तीसरे टी-20 मैच में वेस्टइंडीज को 6
विकेट से शिकस्त देकर मेहमान टीम का 3 मैचों की इस सीरीज में 3-0 से सूपड़ा
साफ कर दिया है. टीम इंडिया की इस जीत में चमके ऋषभ पंत और शिखर धवन दोनों ही बल्लेबाज आउट ऑफ फॉर्म थे, लेकिन जब टीम मुसीबत में थी तो फिर उन्होंने
अपनी बल्लेबाजी के जोहर भी दिखाए.इसी बीच जब ऋषभ पंत बल्लेबाजी कर रहे थे, तो उन्होंने एक ऐसा छक्का जड़
दिया, जिससे मैदान पर मौजूद दर्शकों से लेकर कमेंटेटर भी हैरान रह गए. भारतीय पारी के 13वें ओवर की आखिरी गेंद पर कीरोन पोलार्ड की गेंद पर ऋषभ
पंत ने लॉंग ऑन की दिशा में अपने एक हाथ से ही जबरदस्त छक्का जड़ दिया. पंत
के इस वन हेंडेड छक्के को देख गेंदबाज पोलार्ड के साथ ही हर कोई हैरान रह
गया.ऋषभ पंत ने अपने टी-20 करियर का पहला अर्धशतक जड़ते हुए 38 गेंदों में 58 रनों की पारी खेली. इस पारी के दौरान पंत ने 5 चौके और 3 छक्के जड़े.वेस्टइंडीज ने 182 रनों का लक्ष्य देकर टीम इंडिया को डराया था, जिसके बाद
भारत ने अपना पहला विकेट कप्तान रोहित शर्मा के रूप में 13 रन के स्कोर पर
गंवा दिया. इसके बाद राहुल भी जल्द ही आउट हो गए.लेकिन इसके बाद गब्बर का खामोश बल्ला चल गया और उन्हें ऋषभ पंत का साथ
मिला. पंत भी पिछले 2 टी-20 मैच में नहीं चल पाए थे. पंत और धवन ने मिलकर
तीसरे विकेट के लिए 130 रनों की पार्टनरशिप की. शिखर धवन ने 62 गेंदों में नाबाद 92 रनों की पारी खेली है, जिसमें 2 छक्के और 10 चौके भी शामिल थे.द्र सरकार में मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार का सोमवार
सुबह करीब 2 बजे निधन हो गया. अनंत कुमार दक्षिण भारत के साथ-साथ उत्तर
भारत की राजनीति में काफी लोकप्रिय थे. मोदी सरकार में संसद में फ्लोर
मैनेजमेंट के माहिर थे, यही वजह थी कि उन्हें संसदीय कार्य मंत्री का जिम्मा दिया गया था.
अनंत कुमार पिछले काफी समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. 59 साल के अनंत का पहले लंदन और न्यूयॉर्क में इलाज चला, लेकिन 20 अक्टूबर को ही उन्हें बेंगलुरु लाकर एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांसें लीं.
अनंत कुमार दक्षिण से आते थे, लेकिन वे उत्तर प्रदेश, बिहार समेत उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों की राजनीति में बीजेपी संगठन की ओर से सक्रिय थे. वे लोकसभा चुनाव 2014 और यूपी में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से सक्रिय रहे और कई रैलियां की थीं.
अनंत कुमार कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी के बड़े चेहरे और राष्ट्रीय नेता के तौर पर पहचाने जाते थे. उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीतिक में कदम रख दिया था. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रभावित होकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य बने. इंदिरा गांधी के द्वारा लगाए गए आपातकाल का उन्होंने जमकर विरोध किया. इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.
अनंत कुमार सबसे पहले एबीवीपी का प्रदेश सचिव और 1985 में राष्ट्रीय सचिव बने. बीजेपी के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी काम किया.
कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी की टिकट पर अनंत कुमार ने कांग्रेस के उम्मीदवार नंदन निलकेणी को हराया हैं. अनंत कुमार बैंगलोर दक्षिण से लगातार छठी बार सांसद चुनाव जीत हासिल की है. इसके बाद मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. इससे पहले अटल सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय का जिम्मा भी संभाला था. हालांकि उन्हें बीजेपी के दिग्गज नेता एलके आडवाणी के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है.
1987 में कर्नाटक बीजेपी के सचिव बने. इसके बाद 1996 में बेंगलुरु साउथ से पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया तो खरे उतरे और चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा, राजनीतिक की सीढ़ियां लगातार चढ़ते गए.
अटल बिहारी वाजेपीय के नेतृत्व में जब 1998 में पहली बार सरकार बनी तो दक्षिण भारत के कोटे से अनंत कुमार को मंत्री बनाया गया. अटल सरकार में उड्डयन मंत्री बनाए गए, वह अटल सरकार में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री थे. इसके बाद 1999 में चुनाव में जीते तो वाजपेयी सरकार में कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली.
हालांकि, कर्नाटक की सियासी जंग फतह करने के लिए बीजेपी ने 2003 में उन्हें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी. इसका नतीजा था कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर राज्य में उभरी. 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी भले ही सत्ता से बाहर हो गई थी, लेकिन कर्नाटक में सबसे ज्यादा संसदीय सीटें जीतने में सफल रही थी.
2004 के उन्हों बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई. इस दौरान उन्हें मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों में प्रभारी के तौर पर काम करने किया.
इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में छठी बार लोकसभा सदस्य चुने गए. मोदी सरकार में पहले उन्हें रसायन और खाद मंत्री बनाया गया, लेकिन जुलाई 2016 में संसदीय कार्यमंत्री का जिम्मा भी सौंप दिया गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया.
अनंत कुमार पिछले काफी समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. 59 साल के अनंत का पहले लंदन और न्यूयॉर्क में इलाज चला, लेकिन 20 अक्टूबर को ही उन्हें बेंगलुरु लाकर एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांसें लीं.
अनंत कुमार दक्षिण से आते थे, लेकिन वे उत्तर प्रदेश, बिहार समेत उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों की राजनीति में बीजेपी संगठन की ओर से सक्रिय थे. वे लोकसभा चुनाव 2014 और यूपी में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से सक्रिय रहे और कई रैलियां की थीं.
अनंत कुमार कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी के बड़े चेहरे और राष्ट्रीय नेता के तौर पर पहचाने जाते थे. उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीतिक में कदम रख दिया था. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रभावित होकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य बने. इंदिरा गांधी के द्वारा लगाए गए आपातकाल का उन्होंने जमकर विरोध किया. इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.
अनंत कुमार सबसे पहले एबीवीपी का प्रदेश सचिव और 1985 में राष्ट्रीय सचिव बने. बीजेपी के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी काम किया.
कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी की टिकट पर अनंत कुमार ने कांग्रेस के उम्मीदवार नंदन निलकेणी को हराया हैं. अनंत कुमार बैंगलोर दक्षिण से लगातार छठी बार सांसद चुनाव जीत हासिल की है. इसके बाद मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. इससे पहले अटल सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय का जिम्मा भी संभाला था. हालांकि उन्हें बीजेपी के दिग्गज नेता एलके आडवाणी के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है.
1987 में कर्नाटक बीजेपी के सचिव बने. इसके बाद 1996 में बेंगलुरु साउथ से पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया तो खरे उतरे और चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा, राजनीतिक की सीढ़ियां लगातार चढ़ते गए.
अटल बिहारी वाजेपीय के नेतृत्व में जब 1998 में पहली बार सरकार बनी तो दक्षिण भारत के कोटे से अनंत कुमार को मंत्री बनाया गया. अटल सरकार में उड्डयन मंत्री बनाए गए, वह अटल सरकार में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री थे. इसके बाद 1999 में चुनाव में जीते तो वाजपेयी सरकार में कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली.
हालांकि, कर्नाटक की सियासी जंग फतह करने के लिए बीजेपी ने 2003 में उन्हें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी. इसका नतीजा था कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर राज्य में उभरी. 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी भले ही सत्ता से बाहर हो गई थी, लेकिन कर्नाटक में सबसे ज्यादा संसदीय सीटें जीतने में सफल रही थी.
2004 के उन्हों बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई. इस दौरान उन्हें मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों में प्रभारी के तौर पर काम करने किया.
इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में छठी बार लोकसभा सदस्य चुने गए. मोदी सरकार में पहले उन्हें रसायन और खाद मंत्री बनाया गया, लेकिन जुलाई 2016 में संसदीय कार्यमंत्री का जिम्मा भी सौंप दिया गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया.
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