Tuesday, April 9, 2019

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

इस बात पर लोगों को अचरज हुआ जब 15वीं वित्त आयोग ने 2011 के जनगणना के आंकड़ों का आधार किया है, जबकि 14वीं वित्त आयोगम 1971 के आंकड़े लिए गए थे. इस वजह से कहीं ज्यादा शिक्षित दक्षिण भारतीय राज्यों को बेहतर परिवार नियोजन और कम आबादी के चलते कम अनुदान भी मिला.
बीजेपी इन सवालों के जवाब को पैसों के आवंटन से जोड़ती रही है. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह कहते रहे हैं कि जबसे एनडीए की सरकार बनी है तबसे दक्षिण भारतीय राज्यों को कहीं ज्यादा पैसा मिला है. हालांकि वे ऐसा कहते वक्त ये भूल जाते हैं कि दक्षिण भारतीय राज्य राष्ट्रीय राजस्व में कितना योगदान देते हैं. कर्नाटक और तमिलनाडु देश के आयकर जुटाने वाले देश के शीर्ष चार राज्यों में शामिल हैं.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज के प्रोफेसर नरेंद्र पानी कहते हैं, "15वीं वित्त आयोग उत्तर ङाकच तो ज्यादा तरजीह दी गई क्योंकि वहां आबादी बहुत ज्यादा है. इसलिए भी दिल्ली की उपेक्षा के बाद भी दक्षिण भारतीय राज्यों के बेहतर करने की सोच को बढ़ावा मिला."
इसके अलावा दक्षिण भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी कई बार अहम मुद्दों पर बातचीत के लिए प्रधानमंत्री से समय नहीं मिलने की शिकायत की. इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल और लेफ्टिनेंट गवर्नर भी केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रहे होते हैं.
इसके अलावा अलग अलग राज्यों के अपने मसले भी रहे हैं. तमिलनाडु में एनईईटी, जलीकट्टू और स्टारलाइट, केरल में सबरीमला मंदिर में प्रवेश और कथित तौर पर आरएसएस कार्यकर्ता की हत्याएं, गोवा, कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मांडवी और कावेरी नदी के पानी का बंटवारे के मुद्दों से बीजेपी के एंटी साउथ सेंटीमेंट को ही बढ़ावा दिया है.
कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा कहते हैं, "प्रधानमंत्री द्वारा कमतर आंके जाने का भाव रहा है."
जाहिर है कि पांचों दक्षिण भारतीय राज्यों के ये असमान मुद्दों की भूमिका विभिन्न स्तरों पर रही हैं, जो एक दूसरे से जुड़े भी नजर आते हैं.
लेकिन सवाल वही है कि क्या राहुल गांधी की वायनाड से उम्मीदवारी कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के लिए मैजिक का काम कर पाएगी जो बीजेपी के अभियान को टक्कर दे पाएगी.
कांग्रेस ने इस तरह की क्षेत्रीयता और भाषाई रूढ़िवाद का सहारा कर्नाटक के विधानसभा चुनावों के दौरान लिया था. मेट्रो ट्रेन स्टेशनों में हिंदी भाषा का इस्तेमाल और कर्नाटक में कन्नड़ बोलने वालों को नौकरी में प्राथमिकता देने की मांग, एक तरह से स्मार्ट रणनीति का हिस्सा था.
लेकिन आख़िरकार, कर्नाटक में कांग्रेस 120 से एक तिहाई घटकर 80 सीट पर आ गई थी.
वायनाड से उम्मीदवारी के बाद भी राहुल गांधी मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए विपक्षी दलों को दक्षिण भारत विरोधी के तौर पर प्रचारित करना जारी रखेंगे.
वहीं नरेंद्र मोदी, को चेन्नई एयरपोर्ट से आईआईटी मद्रास तक की पांच किलोमीटर की दूरी हेलिकॉप्टर से तय करनी पड़ी. उन्होंने काले झंडो के विद्रोह से बचने के लिए ऐसा किया था लेकिन उन्हें हेलिकॉप्टर में में काले बैलून देखने पड़ गए.
बहरहाल, भारत के दोनों बड़े राजनीतिक दल इस बात को भूल रहे हैं कि दक्षिण भारत ही नहीं पूरे भारत के बहुत बड़े हिस्से में 'न्यूनतम आय' और 'संकल्पित भारत, सशक्त भारत' का कोई प्रभाव नहीं है.
(कृष्णा प्रसाद आउटलुक साप्ताहिक के पूर्व एडिटर इन चीफ़ हैं और भारतीय प्रेस काउंसिल के पूर्व सदस्य हैं)

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