Friday, September 28, 2018

बरसात के जख्मों पर केंद्र ने दिया 122 करोड़ का मरहम

रकार ने हिमाचल प्रदेश को बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 122 करोड़ का आर्थिक पैकेज जारी किया है। केंद्र सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों के लिए यह पहली किस्त जारी की है। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से दूरभाष पर बातचीत कर हिमाचल में चल रहे बचाव कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि फिलहाल 122 करोड़ के रूप में पहली किस्त जारी की गई है। नुकसान के आकलन के बाद जल्द ही अगली किस्त जारी कर दी जाएगी। प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री की बातचीत के तुरंत बाद गुरुवार को सेना के तीन और हेलिकाप्टर हिमाचल में राहत-बचाव कार्य के लिए भेजे गए हैं। पिछले दो दिनों से एयरफोर्स के तीन हेलिकाप्टर मनाली-लाहुल-स्पीति में बचाव कार्य में जुटे हैं। इसके चलते केंद्र ने हिमाचल मेें छह हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑॅपरेशन के लिए तैनात कर दिए हैं। गुरुवार को पांच हेलिकाप्टर बारालाचा, सिसू, चंद्रताल, कोकसर तथा लाहुल-स्पीति के विभिन्न क्षेत्रों से बर्फबारी में फंसे लोगों को निकालने में जुटे रहे। एयरफोर्स का गुरुवार को दिल्ली से चंबा पहुंचा एक अन्य चौपर नौनिहाल खिलाडि़यों के लिए तैनात किया गया है। होली में फंसे 817 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल कर अब हेलिकाप्टर से पांगी भेजा जा रहा है। जाहिर है कि बुधवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तार से बातचीत हुई थी। इस आधार पर गुरुवार को 122 करोड़ की आर्थिक सहायता और तीन चौपर भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि लाहुल-स्पीति से अब तक एक हजार के करीब पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इसके अलावा 400 अध्यापकों और 800 नन्हे छात्रों को होली से सुरक्षित निकाला गया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल सरकार के लिए सबसे पहले मानवीय सरोकार हैं। गौर हो कि बारिश से हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार अब तक 190 करोड़ जारी कर चुकी है। हिमाचल सरकार ने 15 सितंबर तक हुए नुकसान के रहात कार्यों के लिए 130 करोड़ जारी किए थे। हाल ही में तीन दिन की मची तबाही के लिए 30 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।रद पवार के साथ मिलकर एनसीपी का गठन करने वाले बिहार से सासंद तारिक अनवर ने पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि वो कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं. 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मु्द्दे पर कांग्रेस से बगवात कर शरद पवार के साथ मिलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एनसीपी) की नींव रखने वाले तारिक अनवर ने पार्टी को अलविदा कह दिया है. अनवर ने एनसीपी छोड़ने के साथ-साथ लोकसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है.उच्चतम न्यायालय ने भीमा कोरेगांव से संबद्ध मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी प्रकरण की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने संबंधी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने 2:1 का बहुमत का फैसला सुनाते हुए इतिहासकार रोमिला थापर, देवकी जैन, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और माजा दारुवाला की संयुक्त याचिका ठुकरा दी। न्यायमूर्ति खानविलकर ने खुद की तथा मुख्य न्यायाधीश की ओर से यह फैसला सुनाया, जबकि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने असहमति का फैसला पढ़ा। न्यायमूर्ति खानविलकर ने अपने फैसले में कहा कि पांचों आरोपियों -सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वरवरा राव, वी गोंजाल्विस और अरुण फेरेरा- की गिरफ्तारी का मामला राजनीति विद्वेष से कतई जुड़ा नहीं है। उन्होंने आरोपियों की बजाय इष्ट मित्रों की ओर से याचिका दायर किये जाने पर भी सवाल उठाये और कहा कि गिरफ्तार आरोपियों ने एसआईटी जांच के लिए दरवाजा नहीं खटखटाया।  न्यायमूर्ति खानविलकर ने यह भी कहा कि आरोपी व्यक्ति यह चयन नहीं कर सकता कि मामले की जांच फलां एजेंसी करे, फलां नहीं। उन्होंने, हालांकि आरोपियों को फिलहाल चार हफ्ते और नजरबंद रखने का निर्देश देते हुए कहा कि इस बीच ये आरोपी अपनी जमानत के लिए उपयुक्त अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। न्यायालय ने महाराष्ट्र पुलिस को संबंधित मामले में आगे की जांच जारी रखने का भी निर्देश दिया।  न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने असहमति का अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी बगैर किसी आधार के हुई है। महाराष्ट्र पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है और उसकी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इस मामले की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी से कराना अनिवार्य है। गौरतलब है कि 31 दिसंबर, 2017 को आयोजित एलगार परिषद की बैठक के बाद पुणे के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा की घटना की जांच के सिलसिले में बीते 28 अगस्त को पुणे पुलिस ने माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर उपरोक्त पांचों आरोपियों को गिरफ़्तार किया था, लेकिन इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

Friday, September 14, 2018

ध्यक्ष सहित तीन पदों पर चिव पद पर एनएसयूआई के आकाश चौधरी विजयी

ष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने गुरूवार को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव परिणाम में अध्यक्ष समेत तीन पदों पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को केवल एक पद से संतोष करना पड़ा है। एबीवीपी की अंकिव बसोया ने 1744 मतों के अंतर से अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। इसी संगठन के शक्ति सिंह को उपाध्यक्ष घोषित किया गया है। उन्होंने 7673 मतों के अंतर से जीत हासिल की है। एनएसयूआई के आकाश चौधरी सचिव पद पर जीतने में कामयाब रहे वहीं संयुक्त सचिव पद एबीवीपी की ज्योति को मिला है। 
इससे पहले दोपहर के वक्त ईवीएम में खराबी और छात्रों के भारी हंगामे के चलते मतगणना का काम स्थगित कर दिया गया था। जब वोटों की गिनती स्थगित की गई तब  के सन्नी छिल्लर अध्यक्ष पद पर और  के ही आकाश चौधरी सेक्रेटरी पद पर आगे चल रहे थे।  के सदस्यों ने काउंटिंग सेंटर के बाहर हंगामा किया। उन्होंने कहा कि  अध्यक्ष पर पीछे चल रही है इसलिए प्रशासन रिजल्ट में छेड़छाड़ की कोशिश कर रहा है। चुनाव आयुक्त प्रो. वीके कौल ने कहा की अभी मतगणना स्थगित की जा रही है। हमने सभी संगठनों का ज्ञापन लिया है। मतगणना अगले आदेश तक स्थगित रहेगी।
  ने की मतगणना फिर से शुरू करने की मांग
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक  के शक्ति सिंह ने कहा कि सिर्फ एक   में खराबी थी, इसे रिपेयर किया जा सकता था। हम चाहते है कि काउंटिंग फिर से शुरू हो। हम जैसे ही सभी सीटों पर आगे हुए, अन्य पार्टियां फिर से चुनाव कराए जाने की मांग करने लगी।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक  के रॉकी तुसीद ने कहा कि ये चुनाव केंद्र सरकार की ओर से हो रहे हैं। ईवीएम के साथ छेड़खानी की गई है। हम फिर से चुनाव चाहते हैं। रारम्भिक रुझान में एनएसयूआई और एबीवीपी में अध्यक्ष पद पर टक्कर दिख रही थी। हालांकि, एनएसयू अध्यक्ष और सचिव के पद पर आगे चल रही है। बुधवार को हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में तीन साल बाद मतदान का रिकॉर्ड टूटा। 43.8% छात्रों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। इससे पहले 2014 के डूसू चुनाव में 44.3 फीसदी मतदान हुआ था।ष्मीबाई कॉलेज में सबसे कम केवल13 फीसदी मतदान हुआ। डीयू में शुरू में सभी कॉलेजों में मतदान धीरे शुरू हुआ, लेकिन बाद में न केवल नार्थ कैंपस में बल्कि साउथ कैंपस के भी अधिकांश कॉलेजों में 35 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई।
08:30 AM: 2014 में 44.3 फीसदी मत पड़े थे। हालांकि, यह भी कटु सत्य है कि पिछले 10-11 साल से डीयू 50 प्रतिशत मतदान के लिए तरस रहा है। चुनाव के मद्देनजर सुबह से ही कॉलेजों के बाहर काफी संख्या में छात्र-छात्राएं मतदान करने के लिए पहुंचने लगे थे। वहीं, चुनाव की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस के जवानों ने नॉर्थ कैंपस के अधिकतर रास्तों की बैरिकेडिंग कर रख थी।
08:00 AM:  ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया
छात्र संघ चुनाव में आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई सीवाईएसएस ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। सीवाईएसएस के प्रदेश महासचिव हरिओम प्रभाकर का आरोप है कि सीवाईएसएस-आईसा का पैनल कई जगह मशीनों में गलत पाया गया, जिसे सूचना मिलने के बाद ठीक कराया गया। उन्होंने बताया कि हमें सूचना मिली थी दयाल सिंह कॉलेज व लॉ फैकल्टी के कुछ पोलिंग स्टेशन में पैनल नंबर में गड़बड़ियां हैं। इसे बाद में ठीक कराया गया। उन्होंने दावा किया इस बार डूसू चुनाव में हमारा गठबंधन बड़ा उलटफेर कर सकता है। दोनों संगठनों ने घोषणा पत्र में यू-स्पेशल बस,मेट्रो किराया कम करवाने जैसे वादे शामिल हैं, जिसे हम पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
07:40 AM:  दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच कांटे का मुकाबला हो सकता है। सेंट्रल पैनल से पहले कॉलेजों के पैनल का रुझान बताता है कि दोनों संगठनों के बीच कड़ी टक्कर है। एबीवीपी की मीडिया समन्वयक मोनिका चौधरी ने दावा किया है कि 19 कॉलेजों के पैनल में अध्यक्ष सहित 71 सीटों पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जीत दर्ज की है। उन्होंने कहा कि सोमवार देर शाम तक मिली जानकारी के अनुसार एबीवीपी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। हमें पूरा विश्वास है कि परिणाम भी एबीवीपी के पक्ष में होगा और डूसू में भी चारों सीटों पर हम विजय हासिल करेंगे। इतने कॉलेजों में एबीवीपीकी जीत इस बात का संकेत है कि एबीवीपी पर छात्रों का पूर्ण विश्वास है।.
07:30 AM:  एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने का कहना है कि डूसू चुनाव में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया है। 20 से अधिक कॉलेजों में 75 से अधिक उम्मीदवार एनएसयूआई के जीते हैं और सेंट्रल पैनल की भी सभी सीटों के प्रबल दावेदार हैं।
07:00 AM:  सीवाईएसएस के दिल्ली महासचिव हरिओम प्रभाकर का कहना है कि हम बदलाव के लिए चुनाव में आए हैं और यह बदलाव इस चुनाव में दिखाई देगा। हमारे साथ छात्र एक स्वच्छ राजनीति के लिए जुड़े हैं और हमें मतदान किया है।

Thursday, September 6, 2018

«Wir werden vom Sekten-Chef terrorisiert»

Basel. Fatma Akin wirkt müde. Sie schlafe schlecht und seit Kurzem sei sie auch in psychiatrischer Behandlung. Der ewige Streit mit Scientologen in ihrem Haus gehe ihr langsam an die Substanz. Seit über neun Jahren wohnt das Ehepaar Hüseyin und Fatma Akin in einem sechsstöckigen Wohnhaus am Claraplatz. Das Paar werde notorisch von nächtlichen Klingelstreichen aus dem Schlaf gerissen. Es ertappe Scientologen im Treppenhaus dabei, wie sie ihre privaten Sachen durchwühlen und fotografieren. Zudem werde Fatma Akin vor ihrem Haus von den immer gleichen Scientologen belästigt. Sie würden ihr den Zugang zum Haus verwehren oder sie verbal angehen. Die kleine Frau wisse sich dagegen nicht zu wehren. «Ich verlasse das Haus nur noch mit Hüseyin zusammen», sagt Fatma Akin.
Doch weshalb wird ausgerechnet das Paar Akin vom «Poltergeist Scientology» heimgesucht? Die Eigentümerverhältnisse des Wohnhauses geben Aufschluss: Die Liegenschaft gehört dem Basler Scientology-Präsidenten Patrick Schnidrig, der mehrere Liegenschaften im Raum Basel besitzt. Darunter auch die Parzelle an der Burgfelderstrasse, wo die grösste Zentrale der Schweizer Scientology errichtet wurde. Seit Jahren betreibt die Sekte im ersten Stock in dem Haus am Claraplatz auch ein Büro. «Anfangs hatten wir ein sehr nettes Verhältnis mit Patrick Schnidrig», sagt Hüseyin Akin. Doch mit einigen grossen Umbauarbeiten im Haus und dem verstärkten Auftreten von Scientologen im und vor dem Haus sei die Lage eskaliert.
Fremde Hände in der Post
Das Hauptproblem der Akins mit den Sektenmitgliedern habe Anfang Jahr begonnen. «Aufgrund des Klingelterrors, haben wir eine Überwachungskamera am Hauseingang angebracht und da die Scientologen meine Frau bedrängten, zur Sicherheit auch eine bei der Haustüre», sagt Hüseyin Akin. Die Kamera vor dem Haus habe Schnidrig selber bewilligt, sie jedoch vor einigen Wochen wieder verboten.
Das Paar vermutete zudem, dass seine Stromrechnung künstlich in die Höhe getrieben wurde. Auf Nachfrage hätten die Industriellen Werke Basel denn auch bestätigt, dass der Strom für die Scientology-Werbefilme im Schaukasten vor dem Haus tatsächlich Akins berechnet worden sei. Schnidrig korrigierte und die Kosten halbierten sich.
Ein Fehler, der schnell behoben war, doch die Aufzeichnungen der Kameras bringen Schnidrig selbst in Erklärungsnot. Nicht als Immobilieneigentümer, sondern als Präsident von Scientology. Denn auf der Kamera sieht der Betrachter, wie zwei Scientologen, die sonst vor dem Haus missionieren, mit dem Lift in den dritten Stock fahren und die Schuhschränke des Paars durchwühlen und auch mal etwas mitgehen lassen. Ebenfalls sieht man vor dem Hauseingang, wie ein Mitarbeiter von Schnidrig die Briefkästen durchwühlt und sich die Post der Bewohner ansieht. Über seinen Chef lässt der Mitarbeiter mitteilen, dass er lediglich einen Hausschlüssel holen wollte, der von Scientology-Mitgliedern in den Briefkasten gelegt worden sei. Auf der Überwachungskamera sieht man, dass der Mitarbeiter gleich mehrere Kästen öffnet und deren Inhalt studiert.
Gängige Praxis
Auch der dort angestellte Hauswart, den man auf den Überwachungsbildern dabei sieht wie er die Schränke des Ehepaars Akin durchwühlt und diese fotografiert, ist Mitglied von Scientology. In einem E-Mail an das Ehepaar Akin bestreitet Schnidrig zuerst, dass sein Hauswart Mitglied der Sekte sei. Im Gespräch mit der BaZ räumt er dies jedoch ein, da man den Herrn des Öfteren beim Missionieren am Claraplatz trifft. «Er ist ebenfalls diplomierter Bauingenieur und schaute nach brennbarem Material in den Kästen. Diese sind gemäss Feuerschutzgesetz unberechtigt von Herr Akin dort angebracht worden», so Schnidirg.
Das Ausspionieren und Denunzieren von Menschen, die gegenüber Scientology kritisch eingestellt sind, ist eine gängige und systematische Praxis von Scientologen. Doch einfach klein beigeben will das Ehepaar Akin nicht. «Wir haben hier eine schöne Wohnung an günstiger Lage. Die wollen wir nicht aufgeben. Auch nicht wegen ein paar Scientologen.» Einen Rauswurf würde das Paar juristisch anfechten.

Tuesday, September 4, 2018

蒙古铁蹄马状况略有改观

1月28日,两位保护铁蹄马的内蒙古牧民造访北京。在公众关注铁蹄马保护一年后,他们告诉中外对话,铁蹄马状况略有改观。
去年,蒙古铁蹄马面临绝境,这两位牧民借高利贷6万元紧急买马,保护这一将要灭绝的蒙古马种。北京NGO和公众在一个月内筹钱帮助他们还清贷款。去年11月,  sex
这次他们带来了用于购买铁蹄马所借的借款。宝音达来和阿拉腾告诉中外对话,今年,他们的马群诞生了5匹小马驹,成活了4匹,现在总共27匹铁蹄马了。目前马已经分了群,健康状况良好。尽管发展速度有限,但他们满怀希望。经过一年的努力,当地政府、牧民和社会对百岔铁蹄马有了比较多的认识,由于认识不足导致的铁蹄马的濒危状态已经有所改善。
今年,克什克腾旗的草原年景很好,牧区牛羊的价格因为农业地区肉类食品安全的影响,被抬得很高,他们在秋天里出栏了一些牛羊,获得了丰收。宝音达来和阿拉腾念着借款买马的事,特意带着还款来到北京,与公众见面。
这一年来,全国各地有许多人看到网上的铁蹄马报道,打电话联系他们买马,都被他们回绝了。有内蒙古鄂尔多斯的人想把铁蹄马全部请过去保护,也被拒绝了,宝音达来说:“铁蹄马是属于克什克腾这个地方的,它跟这里的文化和历史紧密相连,不能搬走。”
虽然政府取消了限制养马的规定,但“大畜圈养”的方针仍然存在,这给养马造成许多困难。但宝音达来和阿拉腾下决心要把马养下去。对于这两位牧马人来说,马比什么都重要。
“现在最大的困难是,如何让更多的牧民参与进来,一起保护铁蹄马。”阿拉腾说。如何把马的价值展现出来?这是他们在思考的问题。
百岔铁蹄马的优势之一在于适合作走马,这种马善于长距离快速行走,平稳,它们曾经在骑兵作战时代发挥巨大作用。但是现在,大家虽然知道了百岔铁蹄马的名字,还没有见到它的优势。因此阿拉腾和宝音达来准备挑选两匹走马,让它们在那达慕大会上赛出成绩,使这种马进一步得到人们的认识。 sex
大约20年前,各国政府齐聚里约热内卢召开地球峰会。与会政府一致认为,他们必须抗击气候变化、保护世界生物多样性和减少对土壤的破坏。但在过去20年里,导致气候变化的温室气体在迅速增加,生物多样性持续锐减,自然资源使用量增长了40%。
 
联合国环境署( )的执行主任阿希姆•施泰纳(  )在发布的一份报告中给出了上述概括,这迎合了目前正在南非德班召开的“联合国气候变化框架公约”年度峰会。施泰纳表示:“报告也强调,假如整个世界采取行动,威胁人类福祉的危险趋势会被大大改变——逐步淘汰使用破坏臭氧的化合物的行动就是一个振奋人心的有力例证。” sex
 
全球变暖是由大气中温室气体(主要为二氧化碳)增加导致的。联合国环境署的报告指出,由于化石燃料的使用量不断增长,全球二氧化碳排放量也在持续增加,其中19个国家贡献了全球80%的排放量。可喜的是,单位美元 的二氧化碳排放量与1992年相比下降了23%,这意味着经济增长与资源使用之间已经出现解耦现象(译者注:经济增长与资源消耗不必同时发生)。但是,几乎世界上所有高山冰川都在消退和变薄,这对环境和人类生活产生了严重影响。冰川消融不但会影响现在的海平面上升,也将威胁到近六分之一世界人口的生活福祉。自1992年以来,海平面平均每年上升2.5厘米。
 
报告对1992年以来能源趋势的分析显示,2010年可再生能源(包括生物质能源)约占全球能源供应的16%。太阳能和风能加在一起仅占到全球总能源的0.3%。但是,从2004年到2010年,可持续性能源方面的投资增长了540%,可以看出人们转向低碳、资源高效能源的意识在增强。由于相关技术价格的下降和新政策的实施,作为可持续能源的生物柴油增长了 %,太阳能的使用增长了近 %,风能增长了6000%,生物燃料增长了3500%。
 
但是,难题仍未解决——从1992年到2005年,全球自然资源使用量增长超过了40%。报告警示到,若再不采取协同迅速的行动来遏制资源损耗,并将其与经济增长解耦,人类活动会摧毁这个支撑经济并维持生命的环境。
 
报告指出,尽管欧洲、北美和亚太地区的再造林工程已现成效,但是非洲、拉美和加勒比海地区的森林仍在不断消失,导致1992年以来全球森林面积减少了3亿公顷。获可持续性森林管理认证的森林数量在以每年20%的速度增加,表明消费者对木材生产产生了影响。然而,全球获可持续性管理认证的森林数量仅为10%左右。sex
 
根据报告计算,1992年以来,全球粮食生产增加了45%。这些产量的增加严重依赖于化肥的使用,而化肥在增加土壤肥力的同时也会给环境带来负面影响,比如内陆淡水与海水中的赤潮。好消息是用于有机农业生产的土地面积在以每年13%的速度增加。sex
 
另一条好消息是,世界将完成甚至超额完成千年发展目标中的饮用水方面的目标——截止2015年,发展中地区使用改善的饮用水水源的人口接近90%;而在1990年,这一比例仅为77%。
 
禁用“消耗臭氧层化学物质”的《蒙特利尔议定书》已经成为国际合作挽救世界的一个突出成功案例。由于此协议的实施,1992年至2009年,所有臭氧消耗化学物质排放量减少超过了90%。只有少数国家仍然在使用加铅汽油,而这些国家也有望在明年或后年转向其他产品的使用。 
 
报告对海洋正在不断被酸化表示担忧。这一趋势会给海洋生物带来严重后果,可能会改变海洋物种组成、破坏海洋食物链,也可能会给渔业和旅游活动带来损失。
 
另一个非常令人担忧的问题是,生物多样性在全球范围内下降了12%,而在热带地区则下降了30%。
报告还指出,随着世界人口冲破70亿大关,城市人口自1992年以来增长了45%。但贫民窟的居民人数却从1992年的46%下降到2010年的三分之一,这得益于住房与卫生条件的改善。超过1000万人口的超大城市从1992年的10个增加到去年的21个。不过,现在世界上仍有14亿人口没有稳定的电力供应或电网。
 
该报告的作者称,目前我们缺乏充分可靠的数据和衡量环境质量进展的监测体系,这仍然是实现国际社会设定环境目标的一大障碍。报告强调了环境状况方面需进一步补充的信息,并呼吁全球共同努力来收集科学可靠的数据进行环境监测。 sex

Saturday, September 1, 2018

亚马逊漏油事件 三国环境受牵连

脆弱的亚马逊雨林中发生的漏油事件现在正要越过其第二个国际边境,威胁到巴西。 漏油事件发生在5月31日,其时暴雨引发的山体滑坡冲破了厄瓜多尔的石油管道。这条石油管道位于安第斯山脉山麓,靠近瑞本达道尔( )活火山,由厄瓜由厄瓜多尔多尔国家石油公司 经营。厄瓜多尔每天生产50万桶原油,其中大部分都通过管道出口到美国和中国。

估计有11000桶约42万加仑的油——几乎相当于厄瓜多尔一整天的石油产量——流入了科卡河。这条河是纳波河的支流,而纳波河则是亚马逊河的支流。截至上周,漏油已经污染了有8万人口的科卡市的饮用水,并到达了厄瓜多尔的邻国秘鲁。现在漏油继续流向下游的巴西,引发了环保人士的关注,也让厄瓜多尔在外交上面临尴尬处境。目前,秘鲁正在评估其遭受的损失,并可能会要求赔偿,而巴西向厄、秘两国伸出了援手,帮助他们控制损失。厄瓜多尔国家石油公司则正向受影响的社区发放饮用水和食物。


这并不是厄瓜多尔第一次面临经济发展与环境保护之间的冲突。石油行业对厄瓜多尔的经济发展来说非常重要,占到该国出口收入的一半,但亚马逊的环境也需要保护。美国雪佛龙石油公司于2001年收购的德士古公司(Texaco)被指从1964年至1992年期间向厄瓜多尔低地倾倒了约180亿加仑的炼油废弃物,环保团体与雪佛龙公司之间打了多年的官司至今仍未解决。虽然厄瓜多尔法院已于2011年做出判决,要求雪佛龙公司赔偿180亿美元,但该公司拒绝支付。


现在已被污染的纳波河河道离厄瓜多尔亚苏尼国家公园很近,该公园是联合国教科文组织生物圈保护区,这里的石油储量估计占厄瓜多尔石油总储量的20%。2007年,当时新近当选总统的科雷亚做出了革命性且富有想象力的承诺:亚苏尼国家公园蕴藏的石油价值约70亿美元,如果未来13年内,国际上能够为厄瓜多尔捐助这一价值的一半,即35亿美元,厄瓜多尔就放弃对这一地区的石油开采。他答应把这笔钱用于社会项目、可再生能源和生态系统的保护。
环保部承认,全国地下水只有11.85%优良。2012年,在全国198个地市级行政区、4929个监测点所开展的地下水水质监测中,一半多监测点水质较差或极差,呈良好级和较好级的监测点分别占27.3% 和3.6 %, 水质呈优良级的监测点仅11.8%。环保部于64日发布的《2012中国环境状况公报》(简称《公报》)披露了以上数据。


2013年初各地开始的“邀请环保局长下河游泳”活动,将全民抵抗水污染的情绪点燃。因为河流污染,而政府官员无所作为,一些居民邀请官员下河游泳,以促使官员重视水污染。但没有官员敢接受邀请。此起彼伏的“游泳”邀请,反映了中国水污染的严峻现实。但《公报》叙述概括模糊,又没有详细的解释,并不能清晰反映当前中国水质问题的严重性。
中国人民大学环境学院院长马中认为,淡水环境并无改观,而地下水呈现水质恶化、污染加重的趋势。上周,马中在中外对话2013“中国最佳环境报道奖”研讨会上说:“中国80%的城市要喝地下水,而57%的地下水是不能喝的,喝的肯定是污染的水。”in


更大的问题在于,公众对污染的状况并不清楚,也没有确切正式的信息源。
公报显示,中国西部和西北部地区的河流大多水质优良,东部地区以海河、淮河、松花江等工业和城市分布较多的河流存在不同程度的污染。公报称:中国的五大湖泊中,海河为中度污染,三个为轻度污染。


马中认为,对“轻度”、“中度”的划分标准,应该说明其具体指标,例如某类水质的水占河段的百分比。他发问,“海河劣五类水的河段占40%,这怎么还可能是中度污染呢?”