Friday, September 28, 2018

बरसात के जख्मों पर केंद्र ने दिया 122 करोड़ का मरहम

रकार ने हिमाचल प्रदेश को बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 122 करोड़ का आर्थिक पैकेज जारी किया है। केंद्र सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों के लिए यह पहली किस्त जारी की है। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से दूरभाष पर बातचीत कर हिमाचल में चल रहे बचाव कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि फिलहाल 122 करोड़ के रूप में पहली किस्त जारी की गई है। नुकसान के आकलन के बाद जल्द ही अगली किस्त जारी कर दी जाएगी। प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री की बातचीत के तुरंत बाद गुरुवार को सेना के तीन और हेलिकाप्टर हिमाचल में राहत-बचाव कार्य के लिए भेजे गए हैं। पिछले दो दिनों से एयरफोर्स के तीन हेलिकाप्टर मनाली-लाहुल-स्पीति में बचाव कार्य में जुटे हैं। इसके चलते केंद्र ने हिमाचल मेें छह हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑॅपरेशन के लिए तैनात कर दिए हैं। गुरुवार को पांच हेलिकाप्टर बारालाचा, सिसू, चंद्रताल, कोकसर तथा लाहुल-स्पीति के विभिन्न क्षेत्रों से बर्फबारी में फंसे लोगों को निकालने में जुटे रहे। एयरफोर्स का गुरुवार को दिल्ली से चंबा पहुंचा एक अन्य चौपर नौनिहाल खिलाडि़यों के लिए तैनात किया गया है। होली में फंसे 817 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल कर अब हेलिकाप्टर से पांगी भेजा जा रहा है। जाहिर है कि बुधवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तार से बातचीत हुई थी। इस आधार पर गुरुवार को 122 करोड़ की आर्थिक सहायता और तीन चौपर भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि लाहुल-स्पीति से अब तक एक हजार के करीब पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इसके अलावा 400 अध्यापकों और 800 नन्हे छात्रों को होली से सुरक्षित निकाला गया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल सरकार के लिए सबसे पहले मानवीय सरोकार हैं। गौर हो कि बारिश से हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार अब तक 190 करोड़ जारी कर चुकी है। हिमाचल सरकार ने 15 सितंबर तक हुए नुकसान के रहात कार्यों के लिए 130 करोड़ जारी किए थे। हाल ही में तीन दिन की मची तबाही के लिए 30 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।रद पवार के साथ मिलकर एनसीपी का गठन करने वाले बिहार से सासंद तारिक अनवर ने पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि वो कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं. 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मु्द्दे पर कांग्रेस से बगवात कर शरद पवार के साथ मिलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एनसीपी) की नींव रखने वाले तारिक अनवर ने पार्टी को अलविदा कह दिया है. अनवर ने एनसीपी छोड़ने के साथ-साथ लोकसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है.उच्चतम न्यायालय ने भीमा कोरेगांव से संबद्ध मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी प्रकरण की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने संबंधी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने 2:1 का बहुमत का फैसला सुनाते हुए इतिहासकार रोमिला थापर, देवकी जैन, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और माजा दारुवाला की संयुक्त याचिका ठुकरा दी। न्यायमूर्ति खानविलकर ने खुद की तथा मुख्य न्यायाधीश की ओर से यह फैसला सुनाया, जबकि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने असहमति का फैसला पढ़ा। न्यायमूर्ति खानविलकर ने अपने फैसले में कहा कि पांचों आरोपियों -सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वरवरा राव, वी गोंजाल्विस और अरुण फेरेरा- की गिरफ्तारी का मामला राजनीति विद्वेष से कतई जुड़ा नहीं है। उन्होंने आरोपियों की बजाय इष्ट मित्रों की ओर से याचिका दायर किये जाने पर भी सवाल उठाये और कहा कि गिरफ्तार आरोपियों ने एसआईटी जांच के लिए दरवाजा नहीं खटखटाया।  न्यायमूर्ति खानविलकर ने यह भी कहा कि आरोपी व्यक्ति यह चयन नहीं कर सकता कि मामले की जांच फलां एजेंसी करे, फलां नहीं। उन्होंने, हालांकि आरोपियों को फिलहाल चार हफ्ते और नजरबंद रखने का निर्देश देते हुए कहा कि इस बीच ये आरोपी अपनी जमानत के लिए उपयुक्त अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। न्यायालय ने महाराष्ट्र पुलिस को संबंधित मामले में आगे की जांच जारी रखने का भी निर्देश दिया।  न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने असहमति का अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी बगैर किसी आधार के हुई है। महाराष्ट्र पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है और उसकी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इस मामले की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी से कराना अनिवार्य है। गौरतलब है कि 31 दिसंबर, 2017 को आयोजित एलगार परिषद की बैठक के बाद पुणे के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा की घटना की जांच के सिलसिले में बीते 28 अगस्त को पुणे पुलिस ने माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर उपरोक्त पांचों आरोपियों को गिरफ़्तार किया था, लेकिन इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

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